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PM Kisan e-KYC Failure: तकनीकी खामियों से 48 लाख किसानों की किस्त अटकी, जानें क्या है असली वजह

PM Kisan eKYC Update: तकनीकी खामियों के कारण 48 लाख किसानों की पीएम किसान किस्त रुकी। जानें e-KYC फेल होने के कारण और सिस्टम की असलियत।

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प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना, जो देश के करोड़ों किसानों के लिए एक आर्थिक सहारा है, अब लाखों किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। क्या आपकी भी पीएम किसान की किस्त अचानक रुक गई है? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं।

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, e-KYC (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) प्रक्रिया में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण करीब 48 लाख किसान इस योजना के लाभ से वंचित हो गए हैं। डिजिटल वेरिफिकेशन की जटिलताओं ने ग्रामीण भारत में एक बड़ी कल्याणकारी खाई पैदा कर दी है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि आखिर क्यों सब कुछ सही होने के बाद भी किसानों का स्टेटस ‘Ineligible’ हो रहा है और इसका समाधान क्या है।

Why Farmers are Facing e-KYC Failures?

आंध्र प्रदेश के किसान सुव्वमपुदी नागेश्वरराव जैसे लाखों किसान इस सिस्टम की खामियों का शिकार हैं। उन्होंने जुलाई 2024 में सरकार के फेस ऑथेंटिकेशन ऐप के जरिए अपना e-KYC पूरा किया था। लेकिन कुछ ही समय बाद, उनका स्टेटस वापस ‘eKYC Not Done’ दिखाने लगा। बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन दोबारा कराने के बावजूद, उनकी समस्या हल नहीं हुई और अंततः उन्हें ‘अपात्र’ (Ineligible) घोषित कर दिया गया।

यह समस्या केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है। ओडिशा के वंथला रमेश का अनुभव भी ऐसा ही है—सिस्टम में एक जगह e-KYC ‘पूरा’ दिखाता है, तो दूसरी जगह ‘अधूरा’। इस डेटा विरोधाभास के कारण किसानों के खाते में पैसा आना बंद हो गया है और अधिकारी भी इसका ठोस कारण बताने में असमर्थ हैं।

Technical Glitches: A Barrier for Rural India

सरकार ने पारदर्शिता लाने के लिए 15वीं किस्त से e-KYC अनिवार्य कर दिया था। इसके लिए तीन तरीके अपनाए गए: OTP आधारित, बायोमेट्रिक (CSC पर), और फेस ऑथेंटिकेशन। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है:

  • ​OTP समस्या: कई गरीब किसानों के पास आधार से लिंक मोबाइल नंबर नहीं है या रिचार्ज महंगा होने से नंबर बंद हो गए हैं।
  • बायोमेट्रिक फेलियर: खेती-किसानी करने वाले बुजुर्गों और मजदूरों के हाथों की रेखाएं (फिंगरप्रिंट) घिस जाती हैं, जिससे मशीन उन्हें पहचान नहीं पाती।
  • फेस ऐप की विफलता: खराब इंटरनेट, कम रोशनी और लो-एंड स्मार्टफोन के कारण फेस रिकग्निशन ऐप अक्सर क्रैश हो जाता है या चेहरे को वेरीफाई नहीं कर पाता।

Administrative Lapses and Wrongful Exclusion

रिपोर्ट्स बताती हैं कि जमीनी स्तर पर अधिकारियों पर वेरिफिकेशन का टारगेट पूरा करने का दबाव होता है। सिस्टम की खामियों को सुधारने के लिए पर्याप्त संसाधन न होने के कारण, कई बार पेंडिंग मामलों को सुलझाने के बजाय अधिकारियों द्वारा उन्हें सीधे ‘अपात्र’ मार्क कर दिया जाता है।

आंध्र प्रदेश में किए गए एक फील्ड इन्वेस्टिगेशन में पाया गया कि ‘अपात्र’ घोषित किए गए आदिवासी किसानों में से लगभग 40% वास्तव में योजना के लिए पात्र थे। यानी तकनीकी और प्रशासनिक गलतियों की सजा किसानों को अपनी किस्त गंवाकर भुगतनी पड़ रही है।

Impact of Mandatory Digital Verification

आरटीआई (RTI) से मिले आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 तक 10.64 करोड़ पंजीकृत लाभार्थियों में से 48 लाख से ज्यादा किसानों का e-KYC पूरा नहीं हो सका। यह संख्या सूरत या चेन्नई जैसे बड़े शहरों की आबादी के बराबर है।

सरकार ने ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ के जरिए गावों में कैंप लगाकर इस समस्या को सुलझाने की कोशिश की, लेकिन फील्ड सबूत बताते हैं कि पोर्टल की गड़बड़ियों और स्टाफ की कमी के कारण इसका प्रभाव सीमित रहा। नतीजा यह है कि कल्याणकारी योजना अब एक ‘अधिकार’ के बजाय बार-बार डिजिटल परीक्षा पास करने की ‘शर्त’ बन गई है।

निष्कर्ष

पीएम किसान योजना का उद्देश्य किसानों को आर्थिक संबल देना था, लेकिन अनिवार्य डिजिटल वेरिफिकेशन की तकनीकी बाधाओं ने इसे जटिल बना दिया है। जब तक सरकार e-KYC प्रक्रिया को सरल और त्रुटि-मुक्त नहीं बनाती, या सुधार के लिए ऑफलाइन विकल्प मजबूत नहीं करती, तब तक लाखों पात्र किसान अपने हक के पैसे से वंचित रह सकते हैं। अगर आपका भी पैसा रुका है, तो अपने नजदीकी कृषि अधिकारी से लिखित शिकायत जरूर करें।

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